01 February, 2023

देवगुरु में महिलायें नही करती पूजा

नैनीताल जिला देश में अपनी खूबसूरती के साथ ही आध्यत्मिक शक्ति के केंद्र के रूप में भी विख्यात है।बाबा नीम करौरी,स्वामी विवेकानंद ,नानतिन महाराज सहित कई महापुरुषों ने इस यहां पर कठोर तपस्या की है।यहां कई स्थान ऐसे है जो अपनी आध्यात्मिक शक्ति के लिए पहचान रखे हुए है।इन्हीं में से एक स्थान है देवगुरु बृहस्पति जहां पर आज भी साधु संत तपस्या में लीन रहते है।

देवगुरु बृहस्पति से सूर्यास्त

कैसे पहुचे देवगुरु बृहस्पति

देवगुरु बृहस्पति मंदिर नैनीताल जिले ओखलकांडा ब्लाक में स्थित है।यहाँ पर सावन के महीने में पूजा होती है। चम्पावत और नैनीताल जिले के 52 गाँव के लिए देवगुरु बृहस्पति इष्ट देव है। यहाँ आने के दो रास्ते है। पहला मार्ग है हल्द्वानी-हैड़ाखान-पतलोट-देवली गाँव और उसके बाद पैदल सफर कर यहाँ पहुँचा जा सकता है।दूसरा मार्ग है हल्द्वानी-भीमताल-धनाचूली-शहर फाटक-मोरनौला-नाई-कोटली से यहाँ पहुँचा जा सकता है।कोटली गाँव से भी करीब 5 किमी के पैदल सफर तय कर यहाँ पहुँचा जा सकता है।देवली गाँव से बृहस्पति गुरु 6 किमी है नाई से 11 किमी और कोटली से 6 किमी की दूरी पर स्थित है।

काटली गांव का विहंगम द़श्य

नैनीताल और चम्पावत सीमा से लगा देवगुरु बृहस्पति महाराज मंदिर 8 हजार फीट (2300 मीटर)की ऊँचाई पर स्थित है।ये ध्यानिरौ परगने में पड़ता है।यहाँ पहुँचने के कई मार्ग है लेकिन हर स्थान से 5 से 6 किमी की दूरी तय करनी पड़ती है।इस पूरे इलाके में दो सबसे ऊँचे पर्वत है जिसमे एक देवस्थल है जहाँ एरीज की विश्वस्तरीय दूरबीन लगी हुई है और दूसरा सबसे ऊँचा स्थान देवगुरु है।काटाली गांव से देवगुरु बृहस्पति मंदिर घने जंगलों के बीच स्थित है।बांज,बुरांश,काफल,मोरु,खर्सू के जंगल ट्रैक से होकर यहां पहुचा जाता है।

क्या है देवगुरु बृहस्पति की मान्यता

देवगुरु बृहस्पति प्रजापति अंगिरा के पुत्र तथा तारा के पति कहे जाते है जो अपनी बुद्धि से देवताओं में सबसे श्रेष्ठ है।वे चारों वेदों के प्रकांड विद्यान थे।उन्होंने काशी में भगवान शिव की कठिन तपस्या की।भगवान शंकर उनकी तपस्या से खुश होकर वर मांगने को कहा लेकिन गुरु महाराज मौन रहे तब भोलेनाथ ने कहा कि तुम ग्रहो में बृहस्पति के नाम के पूजित होंगे और देवताओं के गुरु कहलाओगे।

देवगुरु बृहस्पति महाराज

महिलाएं शिवलिंग में क्यों नही करती पूजा?

देवगुरु एक ऐसा स्थान है जहां से सूर्योदय और सूर्यास्त का अनोखा नजारा दिखाई देता है।मंदिर प्रांगण में महिलाओं का प्रवेश वर्जित है।बृहस्पति महाराज के साथ ही चारों तरफ खुले मंदिर में शिवलिंग की भी पूजा की जाती है।लोकमान्यता है कि पहले शिवलिंग की पूजा महिलाएं करती थी।एक बार जल्दबाजी में महिलाओं ने शिवलिंग पर गर्म खीर डाल दी जिसके बाद लिंग खंडित हो गया।इस घटना के बाद शिवलिंग की पूजा महिलाओं के लिए वर्जित हो गई।

इस स्थान से हिमालय की कुमाऊं हिमालय और नेपाल हिमालय की चोटियां दिखाई देती है।चौखंभा,त्रिशूल और पंचाचूली पर्वत श्रृंखलाएं आपकों मंत्रमुग्ध कर देंगीअधिक ऊंचाई और चारों तरफ घने जंगल होने से इस स्थान पर ठंड काफी लगती है।सर्दियों में 4 से 5 फीट तक बर्फ भी पडती है।ये पूरा क्षेत्र गौला नदी का कैचमेंट क्षेत्र भी है।

Sandeep Gusain

नमस्ते साथियों।

मैं संदीप गुसाईं एक पत्रकार और content creator हूँ।
और पिछले 15 सालों से विभिन्न इलेक्ट्रानिक मीडिया चैनल से जुडे हूँ । पहाड से जुडी संवेदनशील खबरों लोकसंस्कृति, परम्पराएं, रीति रिवाज को बारीकी से कवर किया है। आपदा से जुडी खबरों के साथ ही पहाड में पर्यटन,धार्मिक पर्यटन, कृषि,बागवानी से जुडे विषयों पर लिखते रहता हूँ । यूट्यूब चैनल RURAL TALES और इस blog के माध्यम से गांवों की डाक्यूमेंट्री तैयार कर नए आयाम देने की कोशिश में जुटा हूँ ।

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