05 December, 2022

किस्मत और मेहनत से केदारनाथ लाइव

जब केदारनाथ से किया था कपाट उद्धाटन समारोह लाईव

kedarnath live uttarakhand

बात 2015 की थी। अप्रैल माह में केदारनाथ त्रासदी के बाद बाबा केदार धाम के कपाट खुल रहे थे। 2014 में यात्रा ठीक से नही चल पाई क्योकि वहाँ दिक्कते बहुत थी। 2013 की आपदा के बाद राज्य की हरीश रावत सरकार ने निम की मदद से गौरीकुंड केदारनाथ पैदल मार्ग सही कर दिया था। धाम में हेलीपैड बन चुके थे। मंदाकिनी नदी पर पुल बन गया था और धाम में 2 हजार लोगों के रुकने के लिए टैंट कॉलोनी बन गई थी। इसके अलावा भी केदारनाथ धाम में पुनर्निमाण कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा था। इस बार हमें एक ऐतिहासिक टॉस्क दिया गया था वो था केदारनाथ धाम से लाइव…..24 अप्रैल 2015 को बाबा के कपाट खुल रहे थे। प्रशासन और राज्य सरकार युद्ध स्तर पर तैयारियों में जुटी थी और इस कपाट उद्घाटन समारोह को ऐतिहासिक बनाने जा रही थी। कपाट उद्घटान समारोह के समय कांग्रेस नेता राहुल गांधी के आने की उम्मीद थी इसलिए तैयारियां भी जोरों पर थी। इस बार बर्फबाफी से पिछले 20 सालों का रिकॉर्ड टूट गया था। हमारे बॉस संजय श्रीवास्तव ने मुझे और जितेंद्र पेटवाल को 10 दिन पहले केदारनाथ यात्रा की तैयारियों के लिए भेज दिया। मैं और पेटवाल केदारनाथ यात्रा मार्ग में दिक्कते और चुनौतियों की पूरी पड़ताल कर वापस आ गए।

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अब 22 अप्रैल को हमे केदारनाथ के लिए फ्लाईवे को लेकर रवाना होना था। फ्लाईवे एक लाइव मशीन होती है जिसमे में डिस्क और वीसेट होता है। फ्लाईवे उन जगहों पर भेजा जाता है जहाँ ओबी वैन यानी DSNG नही जा सकती। नोएडा ऑफिस से गाड़ी फ्लाईवे लेकर 21 अप्रैल को देहरादून पहुच गई। इंजीनियर अंकित भाई थे जो जम्मू कश्मीर, नार्थ ईस्ट सहित देश के कई ख़तरनाक जगहों पर जा चुके थे। हम सुबह 8 बजे देहरादून से रवाना हो गए। रात सोनप्रयाग में बितानी थी। पेटवाल जी ने ड्राइवर से कह दिया कि अगर कही गाड़ी चलाने में दिक्कत आये तो मैं भी चला सकता हूँ।

इधर अंकित भाई मुझे अपने रोमांचक किस्से सुना रहे थे। हमें क्या मालूम था एक रोमांचक किस्सा हमारा भी इंतजार कर रहा है। करीब शाम को 5 बजे के आस पास हम सोनप्रयाग पहुँच गए थे। मैं और पेटवाल पहले ही सब कुछ शूट कर चुके थे। ड्राइवर भी गाड़ी सही चला रहा था।

इस बीच अंकित भाई से बातचीत में केदारनाथ सुनामी जिसे हिमालयन सुनामी भी कहते है की पूरी कहानी बता दी। सोनप्रयाग में रात को ही हमने अपने सामान को ले जाने के लिए पोर्टर से बात कर ली और सुबह सोनप्रयाग से केदारनाथ जाना था।केदारनाथ में निर्माण कार्य कर रही निम ने भरोसा दिया कि जनरेटर लाने की जरूरत नही है तो हमने अपना 50 किलो के जनरेटर को वही छोड़ दिया।

23 अप्रैल को हमने केदारनाथ की चढ़ाई शुरू कर दी

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सोनप्रयाग से हम अपनी गाड़ी को पार्क कर पैदल ही निकल पड़े। हमें 21 किमी की दूरी तय करनी थी। मात्र 10 दिन पहले मैं और पेटवाल पहले ही केदारनाथ यात्रा कर आये थे लिहाज पैरों की कसरत हो चुकी थी। कैमरा और कुछ बैग छोड़ सभी सामान पोर्टर को दे चुके थे। इस बार कपाट उद्धाटन समारोह को राज्य सरकार खास बनाने जा रही थी। रास्ते में पैदल चलते समय भी काफी चहलपहल थी। इस बीच जैसे ही हमने गौरीकुंड पार किया तब तक साफ हो गया कि राहुल गांधी कपाट उद्घाटन के लिए आ रहे है। ये भी साफ हो गया कि राहुल गांधी पैदल ही गौरीकुंड से चलकर केदारनाथ जाएंगे। साफ था कि केदारनाथ त्रासदी के बाद केदारनाथ कपाट उद्धाटन मेगा शो होने जा रहा था। सीएम हरीश रावत राहुल गांधी को बुलाकर देश और दुनिया के श्रद्धालुओं को एक मैसेज देना चाहते है।

हम कांपते रहे लेकिन जनरेटर स्टार्ट नही हुआ

हम धीरे धीरे केदारनाथ की तरफ बढ़ रहे थे। इस बार रामबाड़ा तक विशालकाय ग्लेशियर आये थे। रामबाड़ा से पैदल मार्ग मंदाकिनी को पार कर लिंचोली होते हुए बनाया गया था। इस पूरे मार्ग में करीब आधा दर्जन बड़े ग्लेशियर थे और बर्फ भी काफी थी। अंकित और उसके साथ आये ड्राइवर को अब थकान लगने लगी। दोनों धीरे धीरे चल रहे थे। लिंचोली से बड़ी लिंचौली और उसके बाद बेस कैम्प पहुँच गए करीब 4 बजे के आस पास हम केदारनाथ पहुँच गए थे। बाबा केदारनाथ की डोली गौरीकुंड से पहुँच थी। हमने खाना खाया और अपना फ्लाईवे को ढूंढने लगे। दोनों बहादुरों ने सामान कहाँ पर रखा।

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ये पता ही नही चल रहा था। सभी पोर्टर निम से जुड़े थे इसलिए निम के लोगों को पूछा तब जाकर पता लगा कि सामान बड़े हेलीपैड पर बनाए गए टैंट कालोनी में रखा है जहाँ प्रशासन और निम का बहुत सामान पहले से रखा हुआ है। अब मुश्किल ये थी कि उन दोनों को कहा ढूंढा जाए। काफी मुश्किल के बाद दोनों मिल गए और हमने अपना फ्लाई वे मंदिर प्रांगण के पास बीकेटीसी के छत पर लगा दिया। साढ़े पांच बजे से अंकित ने फ्लाई वे को खोलना शुरू कर दिया। वही पर आईबीएन7 की टीम भी आई थी।रिपोर्टर प्रतीक त्रिवेदी के साथ रुद्रप्रयाग का कैमरामैन कमल और पौड़ी के इंजीनियर देवेंद्र रावत आए थे। सबसे दोस्ती हुई।

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प्रतीक त्रिवेदी आराम कर रहे थे। आईबीएन7 अपने साथ 2 जनरेटर लेकर आया था। वो 22 अप्रैल को ही पहुँच गए थे। अब रात होने लगी हमने अपना फ्लाई वे तैयार कर लिया लेकिन अब टेस्टिंग जरूरी थी और टेस्टिंग के लिए जनरेटर जरूरी था जो हमने सोनप्रयाग में ही छोड़ दिया। निम ने भरोसा दिया था कि वे जनरेटर दे देंगे। मैं देवेंद्र रावत, अमोध पँवार सहित कई लोगों को फोन कर चुका था।

कपाट खुलने में महज अब कुछ घंटे बाकी थे लिहाजा इस वीवीआईपी कपाट उद्घाटन समारोह में सभी व्यस्त थे। खैर कुछ समय तो लगा लेकिन निम ने एक जनरेटर दे दिया। अंकित और पेटवाल उसे स्टार्ट करने लगे लेकिन वो स्टार्ट ही नही हो रहा था। मंदिर प्रांगण के आसपास बर्फ ही बर्फ थी। ठंड से इन्सान क्या मशीन भी जम जाए। मंदिर के पास ठंड इतनी थी कि खड़ा रहना भी मुश्किल हो रहा था। हमने आईबीएन7 के इंजीनिअर से मदद मांगी क्योकि उनके पास 2 जनरेटर थे और हमारे पास जो था वो स्टार्ट नही हो रहा था। देवेंद्र भाई ने कहा कि हम दे देंगे अगर प्रतीक जी कह देंगे लेकिन उनसे अभी तक मुलाकात भी नही हुई थी। ये सब होता रहा और रात 9 बज गए। ठीक सवा 9 बजे जनरेटर काफी प्रयास करने के बाद स्टार्ट हुआ और अंकित भाई ने वीसेट की टेस्टिंग कर सब ओके कर दिया। इस दौरान बर्फ भी पड़ने लगी। मंदिर के पास करीब 5 घंटे खड़े होकर ऐसा लग रहा था कही हम जम ना जाए। अपना फ्लाईवे को टेस्ट कर हम सब उसे प्लास्टिक से ढक कर चले गए। कपाट 24 अप्रैल यानी अगले दिन 8 बजकर 50 मिनट पर खुलना था लिहाजा हमे असाइनमेंट ने कहा कि सुबह 6 बजे से लाइव रहेगा आप रेडी हो जाईयेगा। हम खाना खाने के लिए बड़े हैलीपैड के पास बने रेस्टोरेस्ट चले गए। केदारनाथ में प्रशासन और पुलिस की टीम पहुँच गए थी।

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करीब 10 बजे मैंने और पेटवाल ने खाना खाया और अपने टैंट में चले गए। पेटवाल ने कहा कि सुबह 5 बजे उठेंगे। लेकिन जब हम टैंट में पहुँचे तो पूरा शरीर कांपने लगा। पेटवाल मैं और इंजीनियर सब ठंड से कांप रहे थे। सर और पेट भी दर्द करने लगा।करीब 5 घंटे मंदिर के पास खड़े होने के कारण ये हालात हो गई। एक घंटे तक हम टैंट में जो स्लीपिंग पैग दिए गए थे उसमें शरीर गर्म होने में लग गया। जब भी सिर दर्द होता है तो इसे हाई अल्टीट्यूट सिकनेस कहते है। पेटवाल सो चुका था और मैं इसी उधेड़बुन में था कि सुबह का लाइव कैसे होगा। जितेंद्र पेटवाल और मैं 2011 में एक ही दिन साधना न्यूज़ में आये थे।उत्तराखंड के बेहतरीन कैमरामैन में से एक पेटवाल जी है। कैमरे की हर बारीकी वो जानते है।

24 अप्रैल का वो दिन मेरे जीवन के लिए यादगार बन गया

24 अप्रैल की सुबह नई ऊर्जा और उमंग लेकर आई थी। आसमान साफ था। सूरज की किरणें धीरे धीरे अपनी लालिमा बढ़ा रही थी। पेटवाल पहले ही उठ चुका था। अंकित ने भी तैयारी कर ली और दोनों मुझे ये कहते हुए की जल्दी आओ हम मंदिर परिसर में पहुच रहे है निकल गए। सुबह केदारनाथ के चारों तरफ बर्फीला रेगिस्तान नजर आ रहा था। अंकित के साथ जो ड्राइवर वो असिस्टेंस इंजीनियर से कम नही था। तीनो मुझे छोड़ चल दिये। मैं काफी नर्वस था कि लाइव कैसे होगा। मैं उतराखण्ड का पहला रिपोर्टर था जो लाइव देने जा रहा था। इससे पहले 2 बार केदारनाथ से लाइव हुआ वो दोनों रिपोर्टर दिल्ली से आये थे। मैं भी जल्दी से तैयार होकर केदारनाथ मंदिर में बनाये गए सेटअप के पास पहुँच गया। वहाँ आते ही फिर मायूसी छा गई। असाइनमेंट में खुद सुबह ही अंजू मैडम आई थी ताकि लाइव बेहतर तरीके से हो। सुबह फिर जनरेटर स्टार्ट नही हुआ। 6 बज चुके थे और हम कुछ नही कर पा रहे थे। हमने फिर निम के प्राचार्य कर्नल अजय कोठियाल से मदद मांगी।निम की पूरी टीम काफी व्यस्त थी। डीएम, कमिश्नर ही नही बल्कि कई बड़े कैबिनेट मंत्री, अम्बिका सोनी, सीएम हरीश सभी आ रहे थे। चूँकि खुद राहुल गांधी लिंचोली पहुँच चुके थे तो सुबह से लगातार हेलिकॉप्टर से मंत्री, अधिकारी और कांग्रेस के बड़े नेताओं के आने का सिलसिला जारी था।

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हम मंदिर के बगल में निराश बैठे थे। आईबीएन 7 से प्रतीक त्रिवेदी लगातार सुबह 6 बजे से लाइव दे रहे थे। पेटवाल ने अंकित से पूछा कि क्या डायरेक्ट लाइट से लाइव कर लें। अंकित ने कहा कि कर तो सकते है लेकिन अगर बोल्टेज हाई हो गया तो कई मशीन फूंक सकती है और ये लाखो की मशीन है अगर कुछ गड़बग हो गई तो लेने के देने पड़ सकते है। इस बीच कर्नल कोठियाल ने कुछ समय बाद ही सही एक और जनरेटर भेज दिया। हमे थोड़ी उम्मीद जगी। पेटवाल ने अपनी तैयारी पूरी कर ली थी। ये करते करते हमें साढ़े सात बज गए। अब दूसरा जनरेटर भी स्टार्ट नही हुआ। केदारनाथ में सुबह के समय भी तापमान -6 डिग्री था इस कारण जनरेटर स्टार्ट होने में दिक्कत हो रही थी। लेकिन हमने हिम्मत नही हारी। ठीक 7 बजकर 40 मिनट पर जनरेटर स्टार्ट हो गया। हम सबने राहत की सांस ली। 5 मिनट में पेटवाल और अंकित ने टेस्टिंग कर सब ओके कर दिया। 7 बजकर 45 मिनट पर मैं लाइव आ गया। मेरा दिल लगातार बहुत तेजी से धड़क रहा था। सांस फूलने लगी और मैं धीरे पूरे केदारनाथ की कहानी बताने लगा। केदारनाथ धाम की त्रासदी और पुनर्निमाण का घटनाक्रम को मैं बारीकी से जानता था।लगातार साढ़े 8 बजे तक मैं लाइव रहा। केदारनाथ मंदिर के चारों तरफ बर्फ की सफेद चादर थी।

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मंदिर प्रांगण में भक्तों की भीड़ उमड़ी हुई थी। परिसर में आर्मी के बैंड बज रहे थे। बाबा के जयकारों से पूरा केदारपुरी गुंजायमान हो चुकी थी। मंदिर प्रांगण के पास करीब 18 फ़ीट ऊँचाई का बर्फ का पहाड़ था जहाँ खड़े होकर मैं और पेटवाल केदारनाथ की  सुंदर वीडियो लाइव देखा रहा था। साढ़े 8 बजे से 9 बजे के बीच चैनल में एक आधे घंटे का एड आ गया और कपाट उद्घाटन ठीक 8 बजकर 50 मिनट पर होना था। मैंने संजय जी से फोन कर इस आधे धंटे के विज्ञापन को गिराने के लिए कहा। उन्होंने बात भी की लेकिन वो चलता रहा इस बीच कपाट खुल गए। ठीक 9 बजे जब दोबारा बुलेटिन शुरू हुआ तो हमने पूरी कपाट उद्घाटन की फीड लाइव चलवा दी और फिर लाइव शुरू हो गया।

।9 बजकर 15 मिनट राहुल गांधी और सीएम हरीश रावत अपने कई कैबिनेट मंत्रियों के साथ मंदिर प्रांगण में पहुँच गए। पूरा माहौल बाबा केदार के रंग में रंग गया। राहुल गांधी जीन्स और जैकेट में पैदल आ रहे थे। उनके पीछे दिल्ली और देहरादून से बड़ी संख्या मीडिया का जमावड़ा चल रहा था। करीब 11 बजे तक लागातर लाइव हुआ। सीएम हरीश रावत से लेकर कई मंत्रियों को लाइव दिखाया। श्रद्धालुओं को पूछा कि क्या उन्हें 2013 की आपदा के बाद कही डर लग रहा है तो सभी ने कहा कि बाबा केदार पर उन्हें काफी भरोसा है अब डर नही लग रहा है। राज्य सरकार ने शानदार कार्य किया है। जितेंद्र पेटवाल ने काफी मेहनत की। बिना नाश्ते के सुबह 5 बजे से लेकर 11 बजे तक शूट किया। शायद उस दिन हम सब पर बाबा का आशीर्वाद था। आगे बद्री विशाल के कपाट खुलने का पूरा वृतांत बहुत रोचक है उसे अगले भाग में बताया जाएगा।

अगले भाग में भू वैकुंठ धाम कपाट उद्घाटन समारोह का वर्णन होगा।

Sandeep Gusain

नमस्ते साथियों।

मैं संदीप गुसाईं एक पत्रकार और content creator हूँ।
और पिछले 15 सालों से विभिन्न इलेक्ट्रानिक मीडिया चैनल से जुडे हूँ । पहाड से जुडी संवेदनशील खबरों लोकसंस्कृति, परम्पराएं, रीति रिवाज को बारीकी से कवर किया है। आपदा से जुडी खबरों के साथ ही पहाड में पर्यटन,धार्मिक पर्यटन, कृषि,बागवानी से जुडे विषयों पर लिखते रहता हूँ । यूट्यूब चैनल RURAL TALES और इस blog के माध्यम से गांवों की डाक्यूमेंट्री तैयार कर नए आयाम देने की कोशिश में जुटा हूँ ।

2 responses to “किस्मत और मेहनत से केदारनाथ लाइव”

  1. Babita gusain says:

    Baba kedarnath ji ki jai ho….Bahut sundar …

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