05 December, 2022

सेब की फसल से महकेंगे इस बार पहाड़, बर्फ़बारी से खिले काश्तकारों के चेहरे

उत्तराखंड में बर्फबारी के बाद सैकडों गांव सफेद चादर से ढक गये है। इस साल हुई भारी बर्फबारी के बाद सैकडों गांव बर्फ में कैद हो गए है।देहरादून के चकराता, चमोली जिले के जोशीमठ, देवाल, चमोली ब्लॉक उत्तरकाशी की भटवाड़ी, मोरी और नौगाँव, रुद्रप्रयाग जिले के उखीमठ, टिहरी जिले, बागेश्वर और पिथौरागढ जिले में सैकडों गावों में इस बार बर्फबारी हुई जिससे बिजली, संचार, पेयजल और आवागमन ठप् हो गया है। भारी बर्फबारी के बाद इन्सान ही नही बल्कि पशुओं के चारे की भी दिक्कतें हो रही है।

apple farming in uttarakhand

चमोली जिले में बर्फबारी के बाद जनजीवन हुआ प्रभावित

चमोली जिले में सबसे ज्यादा गांव प्रभावित हुए है। जिले के जोशीमठ ब्लॉक के उर्गम, नीति और माणा घाटी में बर्फ की सफेद चादर बिछ गई है। इसके अलावा निजमुला घाटी पाणा, ईरानी, घाट ब्लॉक के रामणी, कनोल, सुतोल सहित दर्जनों गांवों में बर्फ की सफेद चादर से ढक गई है।देवाल ब्लॉक के घेस, हिमनी, बलाण, वाण सहित दर्जन भर गॉंव में बर्फबारी से ठंड बढ़ गई है। ऐसे में गंभीर बीमारी और गर्भवती महिलाओं को दिक्कतें आ सकती है। सबसे ज्यादा स्थिति देवाल और जोशीमठ ब्लाक के गांवों में है जहां ज्यादा बर्फबारी हुई है। बद्रीनाथ नेशनल हाईवे भी पाण्डुकेश्वर से आगे बंद है। औली में इस वर्ष काफी बर्फबारी हुई है जिससे औली स्कीईंग रिजार्ट देश दुनिया में पर्यटकों के लिए आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है।

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उत्तरकाशी में भी भारी बर्फबारी से गावों में खडी हुई दिक्कतें

उत्तरकाशी जिले में भी करीब 150 गांव भारी बर्फबारी से प्रभावित हुए है। अकेले मोरी ब्लाक के ही 60 से ज्यादा गांव पूरी तरह बर्फ की सफेद चादर से ढक गये है। मोरी के अलावा पुरोला, नौगाव, डुंडा, चिन्यालीसौंड और भटवाडी ब्लाक में भारी बर्फबारी से जन जीवन प्रभावित हुआ है। भटवाली ब्लाक में सबसे ज्यादा दिक्कत आ रही है। गंगोत्री हाईवे पकोड़ानाला से आगे बंद है। गंगोत्री घाटी में  तापमान शून्य से नीचे चला गया है। मुखबा गांव निवासी रजनीकांत सेमवाल ने बर्फबारी अच्छी हुई है जो सेब के खेेती के लिए काफी मुफीद है। हर्सिल निवासी  मधु रावत नेे कहा कि हर्सिल के सेब पूरे देश में जाने जाते है इस बर्फबारी के बाद इस वर्ष सेब की पैदावार अच्छी होगी।

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रुद्रप्रयाग में भी इस बार हुई रिकार्डतोड बर्फबारी

जिले में इस बार बर्फबारी ने कई सालों का रिकार्ड तोड दिया। ऊखीमठ और जखोली ब्लाक के दर्जनों गांवों में बर्फबारी के बाद ग्रामीणों की मुश्किलें खडी हो गई है। जखोली ब्लाक में 1 दर्जन जबकि ऊखीमठ क्षेत्र में भी 2 दर्जन गांव बर्फ से ढके हुए है। जिले की केदारघाटी, मदमहेश्वर और तुंगनाथ घाटी के कई गांवों में बर्फबारी हुई है जबकि कालीमठ घाटी के जाल और चौमासी गाँव बर्फबारी से ढके हुए है। और जिले में आधा दर्जन सड़कें बंद है।

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पिथौरागढ में भी मुश्किलें कम नही हो रही है

पिथौरागढ जिले में मुन्स्यारी और धारचूला तहसील के दो दर्जन से गांवों में भारी बर्फबारी के बाद बिजली, पेयजल और आवागमन की दिक्कतें बढ गई है। पिथौरागढ जिले में दो दर्जन के करीब सड़कें बंद है। भारी बर्फबारी के बाद कई गांवों का संपर्क जिला मुख्यालयों से कट गया है। थल मुन्स्यारी हाईवे बंद है और लगातार स्नो कटर और जेसीबी से बर्फ हटाई जा रही है। जिले में कई मार्ग बंद है लेकिन थल मुनस्यारी पिछले 10 दिनों से बंद है और इसे खोलने का कार्य किया जा रहा है। धारचूला ब्लॉक के व्यास,चौदास, दारमा और जौहार घाटियाँ बर्फ से ढकी हुई है, हालांकि इन घाटियों के लोग सर्दियाँ शुरू होने से पहले ही निचले इलाकों में आ जाते है।

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टिहरी जिले में घनसाली और प्रतापनगर तहसील में सामने आई है

टिहरी जिले में घनसाली ब्लाक में करीब एक दर्जन से अधिक गांवों में बर्फबारी हुई है जिससे गांवों का संपर्क जिला मुख्यालयों से कट गया है।टिहरी में प्रतापनगर ब्लाक में भी कई गांवों में बर्फबारी हुई है जिससे पेयजल और आवागमन ठप हो गया है। टिहरी जिले में धनोल्टी क्षेत्र में भारी बर्फबारी के बाद पेयजल और ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन की दिक्कतें शुरु हो गई है। घासनाली और भिलंगना ब्लॉक के एक दर्जन गॉंव में बर्फ की चादर बिछी हुई है। इन इलाकों में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग पशुपालन करते है कई गाँवों में जाने के लिए पैदल मार्ग और सड़क मार्ग भी क्षतिग्रस्त हुए है।

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देहरादून जिले चकराता और त्यूणी क्षेत्र के 50 गांवों बर्फ में कैद

चकराता और त्यूणी क्षेत्र के करीब 50 गांवों भारी बर्फबारी के बाद बर्फ में कैद हो चुके है। चकराता ब्लाक के करीब 50 गावों में 40 हजार की आबादी बर्फबारी से प्रभावित हो चुकी है। ग्रामीणों की माने तो तापमान शून्त हो गया है। लोहारी गांव की दर्शनी राणा ने कहा कि  पेयजल लाइन ठप हो गई है और काफी दूर से पीने के लिए पाना लाना पड रहा है। चकराता से आगे लोहारी, जाड़ी, सिजला, कोटी कानासर, मसक, संताड़, राजणु, गोरछा, पिंगवा, कंडोई और भ्रम क्षेत्र के कई गांवों का संपर्क अभी भी मुख्यालय से कटा हुआ है। इस पूरे क्षेत्र में 1 फरवरी से स्कूल खुलने जा रहे है लेकिन स्कूलों में शिक्षक कैसे पहुचेगे ये एक चुनौती बनी हुई है।

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नैनिताल जिले के मुक्तेश्वर क्षेत्र में हुई बर्फबारी

नैनिताल जिले में रामगढ़, धारी और ओखलकांडा ब्लॉक में बर्फ़बारी से काश्तकारों के चेहरे खिल उठे है। पिछले वर्ष बर्फबारी नही हुई थी।हालांकि कई इलाकों में बर्फ पिघल चुकी है लेकिन ठंड अभी अभी जारी है। शीतलहर के कारण पहाड़ो में भी ठंड का अहसास हो रहा है।नैनिताल जिले की धारी और रामगढ़ ब्लॉक सेब ,आड़ू, पुलम, खुमानी की बड़ी संख्या में पैदावार होती है। पिछले वर्ष सेब की फसल को बर्फबारी ना होने के कारण काफी नुकसान हुआ था लेकिन इस बार फसल की पैदावार अच्छी होने का अनुमान है। मुक्तेश्वर क्षेत्र सेब की फसल के लिए जाना जाता है। सेब काश्तकार देवेंद्र बिष्ट कहते है कि बर्फबारी इस बार ठीक हुई है इससे सेब की फसल को जो चिलिंग टाइम चाहिए वो मिल रहा है।

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काश्तकारों और पर्यटन कारोबार के लिए वरदान साबित होगी बर्फबारी

 बर्फबारी से एक ओर ग्रामीणों की मुश्किलें बढ गई तो दूसरी तरफ काश्तकारों और पर्यटन कारोबारियों के लिए शुभ संकेत है।सेब खुमानी, पुलम और अखरोट की खेती के लिए बर्फबारी काफी फायदेमंद होता है। कृषि और बागवानी के विशेषज्ञ डा महेन्द्र कुंवर ने कहा कि सेब की फसल के लिए 50 से 70 दिनों तक  चिलिंग पिरीयड की आवश्यकता होती है और इस बार अच्छी बर्फबारी से सेब की फसल को ये चिलिंग पिरीयड मिल जाएगा। डा कुंवर ने कहा कि उत्तराखंड में लो चिलिंग वैरायटी के सेब लगाये गये है जिसमें रेड डिलीसियस और गोल्डन डिलीसियस प्रमुख है।

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प्रदेश में सेब का उत्पादन उत्तरकाशी जिले में हर्सिल, मोरी, पुरोला और नौगांव क्षेत्र में होती है लेकिन अब रुद्रप्रयाग और चमोली गढवाल में भी सेब का उत्पादन शुरु हो गया है। चमोली गढवाल में जोशीमठ, देवाल, पोखरी, घाट ब्लाक में सेब की खेती शुरु की गई है। नैनीताल जिले में रानगर और मुक्तेश्वर क्षेत्र में अब लो चिलिंग वैरायटी के सेबों का उत्पादन शुरु हो चुका है। पिथौरागढ के मुन्स्यारी और धारचूला क्षेत्र में सेब, पुलम, अखरोट की खेती कर रहे है।

Sandeep Gusain

नमस्ते साथियों।

मैं संदीप गुसाईं एक पत्रकार और content creator हूँ।
और पिछले 15 सालों से विभिन्न इलेक्ट्रानिक मीडिया चैनल से जुडे हूँ । पहाड से जुडी संवेदनशील खबरों लोकसंस्कृति, परम्पराएं, रीति रिवाज को बारीकी से कवर किया है। आपदा से जुडी खबरों के साथ ही पहाड में पर्यटन,धार्मिक पर्यटन, कृषि,बागवानी से जुडे विषयों पर लिखते रहता हूँ । यूट्यूब चैनल RURAL TALES और इस blog के माध्यम से गांवों की डाक्यूमेंट्री तैयार कर नए आयाम देने की कोशिश में जुटा हूँ ।

2 responses to “सेब की फसल से महकेंगे इस बार पहाड़, बर्फ़बारी से खिले काश्तकारों के चेहरे”

  1. पारस सिंह रावत says:

    बहुत सुंदर🙏🙏🙏

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